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Can We Be Strangers Again?

Can We Be Strangers Again?

Veröffentlicht: 2025-08-13
© Prabhat Prakashan Pvt Ltd
Can We Be Strangers Again? - QR Code
Veröffentlicht: 2025-08-13
© Prabhat Prakashan Pvt Ltd

Beschreibung

"प्रेम, निष्ठा और जाने देने की मधुर कड़वी सुंदरता की एक मार्मिक कहानी ! कॉलेज लाइफ की बिजली की धुंध में तीन दोस्त हँसी-मजाक, देर रात तक की बातचीत और अनकहे वादों से बँधे हुए हैं। लेकिन जब उनमें से दो, दोस्ती में प्यार की रेखा पार करते हैं, तो सबकुछ बदल जाता है। विश्वासघात उनकी दुनिया को तहस-नहस कर देता है, जिससे एक दोस्त को अपनी जटिल भावनाओं से जूझते हुए टुकड़ों को उठाना पड़ता है।
जैसे-जैसे दोस्ती टूटती है और प्यार उलझता जाता है, दिल टूटते हैं और चुनाव अपरिवर्तनीय होते जाते हैं। खोई हुई दोस्ती के दर्द और प्यार के कड़वे-मीठे आकर्षण के बीच फँसे देव को यह तय करना होगा कि क्या वह फिर से सबकुछ जोखिम में डालने को तैयार है। अटूट लगने वाले संबंधों और हमेशा के लिए बने रहने वाले प्यार के साथ कॉलेज एक गहन समय होता है। लेकिन जब उन बंधनों का परीक्षण किया जाता है, तो हम सीखते हैं कि हम वास्तव में कौन हैं और हम किस चीज को सबसे ज्यादा महत्त्व देते हैं।
उम्मीद है कि यह पुस्तक उन सभी लोगों को पसंद आएगी, जिन्होंने दोस्ती और प्यार के बीच संतुलन बनाने के लिए संघर्ष किया है, और जिन्हें जाने देने की दर्दनाक लेकिन जरूरी कला का सामना करना पड़ा है।"

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